नया प्राधिकरण लाएगा शिक्षा में एकरूपता और गुणवत्ता,452 मदरसों पर सख्ती, शिक्षा में बड़ा सुधार शुरू


उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड के तहत संचालित साढ़े चार सौ मदरसों पर तीस जून के बाद ताला लटक सकता है। नई व्यवस्था में सख्त मानकों की अनिवार्यता ने मदरसा संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकांश मदरसों का संचालन करने वाली संस्था जमीयत उलेमा ए हिंद इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गई है।देवभूमि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड के तहत 452 पंजीकृत मदरसे हैं, जिनकी मान्यता अब मदरसा बोर्ड के साथ ही 30 जून को खत्म हो रही है। करीब 46 हजार बच्चे इससे जुड़े हैं। एक जुलाई से मदरसा बोर्ड का स्थान उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ले लेगा और इन मदरसों को जिला विद्यालय शिक्षा समिति से और हाईस्कूल वाले मदरसे उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेंगे।छोटे कमरों और मस्जिदों में चल रहे मदरसेसरकार की नई व्यवस्था ये कहती है कि अब वही मदरसे चल सकेंगे, जो तय मानकों पर खरे उतरेंगे। लेकिन 99 फीसदी मदरसे छोटे कमरों, मस्जिदों या निजी इमारतों में चल रहे है। इनके पास न खेल का मैदान है, न प्रशिक्षित शिक्षक। मदरसा संचालक बदलाव की इस बात को इस्लामिक शिक्षा को टारगेट करने के नैरेटिव से जोड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जमीयत उलेमा ए हिंद इस मामले को हाईकोर्ट ले गई है क्योंकि यूपी में मदरसे बंद किए जाने के खिलाफ जमीयत को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिली थी।प्राधिकरण तय करेगा पाठ्यक्रमअल्पसंख्यक मामलों के विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते का कहना है कि हमने मदरसा बोर्ड भंग किया है और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित किया है, जिसमें सभी अल्पसंख्यक समुदाय सिख, बौद्ध, पारसी, ईसाई भी समाहित हैं। ये धार्मिक शिक्षा देंगे लेकिन क्या शिक्षा देंगे, इसका पाठ्यक्रम प्राधिकरण तय करेगा।क्या होंगे मानकःशहरी क्षेत्र में कम से कम आधा एकड़ तो ग्रामीण क्षेत्र में एक एकड़ जमीनकक्षा 1-8 के लिए कम से कम 5 से 8 कमरे जरूरी हैंडीएलएड/बीएड टीईटी पास शिक्षकलाइब्रेरी, पानी, टॉयलेट, खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएंहर संस्थान को समान नियमों का पालन करना होगासरकार का कहना है कि ये कदम अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार के लिए है। हर संस्थान को समान नियमों का पालन करना होगा। NCERT पाठ्यक्रम लागू होगा, धार्मिक शिक्षा भी तय ढांचे में दी जा सकेगी। यानी तस्वीर साफ है- या तो मदरसे खुद को स्कूल के मानकों में ढालें या फिर सिस्टम से बाहर हो जाएं ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्पष्ट कह चुके हैं कि मदरसो में क्या पढ़ाया जाएगा ये सरकार तय करेगी, सब बच्चे बेहतर और एक जैसी शिक्षा लें इसलिए यह प्राधिकरण बनाया गया है।पहचान छुपाकर बच्चों को उत्तराखंड के मदरसों में लाया जाता है और उन्हें क्या तालीम दी जाती है वह किसी को पता नहीं, मदरसों में बच्चों का शोषण हो रहा है ऐसी शिकायतें बाल आयोग और अन्य संस्थाओं ने सरकार को भेजी है।अधिकांश मदरसों पर ताले लटकना तयबहरहाल, ये जमीनी हकीकत है कि अधिकांश मदरसों के पास न पर्याप्त जमीन है न जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर। ऐसे में ज्यादातर मदरसों पर ताले लटकना तय माना जा रहा है।
