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मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आचार्य नागार्जुन जिन्होंने सदियों पहले सोना, चांदी, तांबे, लौह, पारा व अभ्रक आदि का इस्तेमाल कर औषधीय भस्म बनाने की विधि तैयार की थी या महर्षि सुश्रुत जिन्होंने जटिल से जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए थे। यह सभी भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी गर्व करता है।   

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आचार्य नागार्जुन जिन्होंने सदियों पहले सोना, चांदी, तांबे, लौह, पारा व अभ्रक आदि का इस्तेमाल कर औषधीय भस्म बनाने की विधि तैयार की थी या महर्षि सुश्रुत जिन्होंने जटिल से जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए थे। यह सभी भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी गर्व करता है।  

उत्तराखंड, देहरादून
  मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आचार्य नागार्जुन जिन्होंने सदियों पहले सोना, चांदी, तांबे, लौह, पारा व अभ्रक आदि का इस्तेमाल कर औषधीय भस्म बनाने की विधि तैयार की थी या महर्षि सुश्रुत जिन्होंने जटिल से जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए थे। यह सभी भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी गर्व करता है।     सीएम धामी ने सभी चिकित्सकों का आह्वान करते हुए कहा कि डॉक्टरी का पेशा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक "नोबल प्रोफेशन" है, जो सेवा, संवेदना और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनता के मन में डॉक्टर के प्रति जो आस्था, सम्मान और श्रद्धा है, उसे और मजबूत करें। सभी चिकित्सकों से अनुरोध है कि अपने आचरण, सेवा और समर्पण से हमेशा अपनी उस छवि को जीवित रखें, जो समाज ने डॉक्टर को 'धरती का भगवान' कहकर दी है। मुख्यमं...