उत्तराखण्ड को टी.बी. मुक्त बनाने की मुहिम में मील का पत्थर साबित होगा श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल का डी.आर.टी.बी. सेंटर

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उत्तराखण्ड को टी.बी. मुक्त बनाने की मुहिम में मील का पत्थर साबित होगा श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल का डी.आर.टी.बी. सेंटर

– स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में किया डी.आर.टी.बी सेंटर का उद्घाटन


– डी.आर.टी.बी. सेंटर में बिगड़ी टीबी के मरीजों को एक छत के नीचे मिलेगा क्वालिटी केयर निःशुल्क टी.बी उपचार

देहरादून।

उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने गुरुवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के छाती एवम् श्वास रोग विभाग द्वारा स्थापित डी.आऱ.टी.बी. सेंटर का उद्घाटन किया।
केन्द्र सरकार के सेंटर टी.बी. डिविजन के मानकों के अनुपालन में ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरक्लोसिस सेंटर (डी.आर.टी.बी. सेंटर ) की स्थापना की गई है।
केन्द्र सरकार ने देश में क्षय रोग (टी.बी.) को वर्ष 2025 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, वहीं उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2024 का लक्ष्य निर्धारण कर राज्य को पूरी तरह से टी.बी. मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इस कड़ी में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल का डी.आऱ टी.बी. सेंटर केन्द्र व राज्य सरकार की इस मुहिम में महत्वपूर्णं भूुमिका निभाएगा।
यह बात स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कही।

गुरुवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के सभागार में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखण्ड ने डी.आऱ टी.बी. सेंटर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में राज्य के निजी सहभागिता वाले संस्थान सरकार के साथ अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने कोरोना काल में निजी अस्पतालों की भूमिका की विशेष रूप से सराहना की।
आयुष्मान लाभार्थियों के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को सबसे महत्वपूर्णं व बड़ा सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल राज्य सरकार के साथ महत्ती भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज के प्राचार्य डॉ यशबीर दीवान ने कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज का यह सपना है कि उत्तराखण्ड के गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। इस ध्येय को पूरा करने के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल परिवार मिशन के रूप में कार्य कर रहा है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को उत्तराखण्ड व उत्तराखण्ड के समीपवर्ती राज्यों के मरीजों की लाइफलाइन के रूप में जाना जाता है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का ही परिणाम है कि आमजन व मरीजों के बीच श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को लोकप्रिय अस्पताल के रूप में पहचान मिली।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ जगदीश रावत, विभागाध्यक्ष, छाती एवम् श्वास रोग विभाग ने कहा कि डी.आर.टी.बी. सेंटर विशेष रूप से बिगड़ी हुई टी.बी. के मरीजों के उपचार के लिए तैयार किया जाता है। ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरक्लोसिस सेंटर (डी.आर.टी.बी. सेंटर) में सामान्य टी.बी. के मरीजों से अलग आइसोलेट करके रखा जाता है। ऐसे मरीजों को उपचार की सभी सुविधाएं डी.आर.टी.बी. सेंटर में निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में स्थापित छाती एवम् श्वास विभाग के डॉक्टरों की देखरेख में क्वालिटी केयर उपचार टी.बी. उपचार मरीजों को उपलब्ध करवाया जाता है। उत्तराखण्ड व समीपवर्ती राज्यों के बिगडी टी.बी. मरीजों के लिए डी.आर.टी.बी. सेंटर वरदान साबित होगा। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में डी.आर.टी.बी. सेंटर के शुभारंभ पर उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग ने प्राईवेट पार्टनर के रूप में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को डी.आर.टी.बी. सेंटर चलाने की अनुमति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ एस.के. झा व जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज वर्मा का आभार जताते हुए कहा कि समय समय पर उनका मागदर्शन प्राप्त हुआ जिसके फलस्वरूप आज सफलता पूर्व डी.आर.टी.बी. सेंटर की स्थापना हुई व आज इसका शुभारंभ हो रहा है।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के सहयाक चिकित्सा अधीक्षक डॉ गौरव रतूड़ी ने कहा कि अस्पताल में गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएं किफायती दरों आमजनों के लिए उपलबध हैं। अस्पताल की स्पेशलिटी व सुपरस्पेशलिटी सेवाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी व धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का समन्वय व संचालन डॉ रितिशा भट्ट ने किया। इस अवसर पर डॉ संजीव कुमार, डॉ आर.पी.सिंह, मनोज तिवारी, डॉ देव सिंह जंगपांगी, डॉ अनिल कुमार, दीपक थपलियाल, नर्सिंग अधीक्षक दीपक कुमार सहित अस्पताल के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डॉक्टर, स्टाफ सदस्य व मेडिकल छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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